मधुबनी में हर शुक्रवार मनाया जाएगा “No Vehicle Day”

बिहार सरकार के निर्देशों के आलोक में मधुबनी जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब जिले में प्रत्येक शुक्रवार को “No Vehicle Day” के रूप में मनाया जाएगा।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य ईंधन संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा मितव्ययिता को बढ़ावा देना है। प्रशासन ने सभी जिला, अनुमंडल, प्रखंड एवं अंचल स्तरीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे शुक्रवार के दिन मोटर वाहनों का उपयोग न करें।

किन माध्यमों से कार्यालय आने का निर्देश?

जारी आदेश में कहा गया है कि अधिकारी एवं कर्मचारी शुक्रवार को कार्यालय आने के लिए निम्न माध्यमों का उपयोग करें—

  • पैदल
  • साइकिल
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट

सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही सरकारी अथवा निजी वाहनों के उपयोग की अनुमति होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों को भी दिए गए निर्देश

जिला प्रशासन ने सभी वरीय पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी “No Vehicle Day” का पालन करें।

इस अभियान के माध्यम से आम जनता के बीच भी ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

आदेश की प्रमुख बातें

  • प्रत्येक शुक्रवार “No Vehicle Day” घोषित
  • मोटर वाहन उपयोग पर रोक
  • पैदल, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
  • ईंधन संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
  • सभी सरकारी कार्यालयों में पालन अनिवार्य

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी कर्मचारी नियमित रूप से वाहन मुक्त दिवस का पालन करेंगे, तो इससे प्रदूषण में कमी आएगी और आम नागरिकों को भी प्रेरणा मिलेगी।

यह पहल बिहार सरकार की हरित एवं पर्यावरण अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

👉 आधिकारिक पत्र डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए रेफरेंस लिंक पर क्लिक करें।

आदेश कब जारी हुआ?

यह आदेश जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा दिनांक 15 मई 2026 को जारी किया गया। आदेश संख्या 1691/गो० के माध्यम से सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

निष्कर्ष

“No Vehicle Day” जैसी पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि इससे ईंधन की बचत और स्वास्थ्य लाभ भी संभव है। यदि इस अभियान को गंभीरता से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।