बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम
बिहार सरकार का शिक्षा विभाग लगातार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए नए-नए प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में 4 जुलाई 2026 को विशेष अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (Parent Teacher Meeting - PTM) आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि एक ऐसा अभियान है जिसके माध्यम से विद्यालय से बाहर रह रहे (Out of School) बच्चों की पहचान, उनका पुनः नामांकन, बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा विद्यालय की मौलिक सुविधाओं से अभिभावकों को अवगत कराया जाएगा। शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में इन उद्देश्यों और कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है।
बड़ी खबर (Highlights)
- 4 जुलाई 2026 को पूरे बिहार के सरकारी विद्यालयों में विशेष PTM आयोजित होगी।
- मुख्य विषय: "ड्रॉप आउट, सरकारी योजनाएं एवं विद्यालय की मौलिक सुविधाएं"
- विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान एवं पुनः नामांकन पर विशेष जोर।
- सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक अभिभावक तक पहुँचाई जाएगी।
- बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति, स्वास्थ्य एवं पोषण पर विस्तृत चर्चा होगी।
- अधिक से अधिक अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला, प्रखंड, CRC एवं विद्यालय स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निर्धारित की गई हैं।
आखिर यह PTM इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे विद्यालय में नामांकित तो होते हैं, लेकिन नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते। कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। कुछ बच्चों की पढ़ाई कमजोर हो जाती है, जबकि कई अभिभावकों को यह जानकारी भी नहीं होती कि सरकार उनके बच्चों के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ चला रही है।
इन सभी समस्याओं का समाधान केवल विद्यालय के प्रयासों से संभव नहीं है। जब तक अभिभावक, शिक्षक और समुदाय एक साथ मिलकर कार्य नहीं करेंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
इसी सोच के साथ शिक्षा विभाग ने इस विशेष अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन करने का निर्णय लिया है, ताकि प्रत्येक अभिभावक विद्यालय से जुड़ सके और अपने बच्चे की शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभा सके।
शिक्षा विभाग ने यह निर्णय क्यों लिया?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, यह कार्यक्रम पहले Back to School सप्ताह के दौरान 27 जून 2026 को आयोजित किया जाना था। लेकिन अत्यधिक गर्मी एवं कुछ जिलों में अवकाश घोषित होने के कारण सभी विद्यालयों में PTM आयोजित नहीं हो सकी। इसलिए विभाग ने निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जहाँ यह बैठक नहीं हो पाई है, वहाँ इसे 4 जुलाई 2026 को अनिवार्य रूप से आयोजित कराया जाए।
यह निर्णय केवल तिथि बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी विद्यालय इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से वंचित न रहे।
PTM का मुख्य विषय क्या है?
इस बार की अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का विषय है—
"ड्रॉप आउट, सरकारी योजनाएं एवं विद्यालय की मौलिक सुविधाएं"
यह विषय अपने आप में बहुत व्यापक है। इसका उद्देश्य केवल बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा करना नहीं, बल्कि विद्यालय से जुड़ी हर उस जानकारी को अभिभावकों तक पहुँचाना है, जो उनके बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकती है।
PTM के प्रमुख उद्देश्य
इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा—
1. विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान
जो बच्चे विद्यालय नहीं आ रहे हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उनकी पहचान कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ना।
2. नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना
हर बच्चे की विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना।
3. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
बच्चों के सीखने के स्तर, कक्षा में सहभागिता और अध्ययन की गुणवत्ता पर चर्चा करना।
4. सरकारी योजनाओं की जानकारी
अभिभावकों को यह बताना कि उनके बच्चों को किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
5. विद्यालय की सुविधाओं की जानकारी
विद्यालय में उपलब्ध पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल सामग्री, प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं की जानकारी देना।
6. घर पर पढ़ाई का वातावरण
अभिभावकों को प्रेरित करना कि वे घर पर बच्चों के लिए पढ़ाई का अनुकूल वातावरण बनाएं।
7. सामुदायिक भागीदारी
विद्यालय के विकास में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
PTM से किसे लाभ होगा?
यह कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं बल्कि सभी हितधारकों के लिए लाभकारी है।
विद्यार्थियों को लाभ
- पढ़ाई में सुधार
- नियमित उपस्थिति
- आत्मविश्वास में वृद्धि
- बेहतर सीखने का वातावरण
- सरकारी योजनाओं का लाभ
अभिभावकों को लाभ
- शिक्षक से सीधे संवाद का अवसर
- बच्चे की प्रगति की जानकारी
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
- विद्यालय की सुविधाओं की जानकारी
- घर पर पढ़ाई कराने के सुझाव
शिक्षकों को लाभ
- अभिभावकों का सहयोग मिलेगा।
- बच्चों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।
- अनुपस्थित विद्यार्थियों की स्थिति स्पष्ट होगी।
- विद्यालय और समाज के बीच विश्वास बढ़ेगा।
विद्यालय को लाभ
- नामांकन में वृद्धि
- उपस्थिति में सुधार
- समुदाय का सहयोग
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
- बेहतर परिणाम
शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य केवल बैठक करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक अभिभावक तक पहुँच बनाना है। विशेष रूप से ऐसे परिवारों से संपर्क करने पर जोर दिया गया है जिनके बच्चे—
- विद्यालय नहीं आ रहे हैं,
- ड्रॉपआउट हो चुके हैं,
- नियमित उपस्थिति नहीं रखते,
- विशेष सहयोग की आवश्यकता रखते हैं।
इसीलिए विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि अधिकतम अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
इस PTM की सबसे बड़ी विशेषता
इस बार की संगोष्ठी केवल "रिपोर्ट कार्ड दिखाने" तक सीमित नहीं होगी। इसमें बच्चों के समग्र विकास पर चर्चा होगी।
बैठक के दौरान निम्न विषयों पर विशेष फोकस रहेगा—
- बच्चों का शैक्षणिक स्तर
- उपस्थिति
- स्वास्थ्य एवं पोषण
- स्वच्छता
- अनुशासन
- घर पर अध्ययन
- सरकारी योजनाएँ
- विद्यालय की आधारभूत सुविधाएँ
- ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी
- सामुदायिक सहयोग
PTM में किन सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा सकती है?
विद्यालय अपने स्तर पर अभिभावकों को विभिन्न छात्रहित योजनाओं की जानकारी दे सकते हैं, जैसे—
- नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण
- छात्रवृत्ति योजनाएँ
- पोशाक योजना
- साइकिल योजना (जहाँ लागू)
- मध्याह्न भोजन योजना
- खेल सामग्री
- पुस्तकालय सुविधा
- ICT एवं स्मार्ट क्लास
- स्वच्छ पेयजल
- शौचालय सुविधा
- बाल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कार्यक्रम
इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सुविधा प्रदान करना नहीं बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी है।
PTM केवल बैठक नहीं, बल्कि सामाजिक अभियान
यदि इस कार्यक्रम को गंभीरता से लागू किया जाता है तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चे दोबारा पढ़ाई से जुड़ सकते हैं, अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास बढ़ेगा और बच्चों के भविष्य को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी विकसित होगी।
इसी कारण शिक्षा विभाग ने सभी स्तरों पर इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और स्पष्ट कहा है कि कार्यक्रम का प्रभावी आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
बिहार PTM 2026: जिला, प्रखंड, CRC, प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों की क्या होगी जिम्मेदारी? जानिए पूरी तैयारी, प्रचार-प्रसार और आयोजन की विस्तृत प्रक्रिया
Series: Bihar PTM 2026 Complete Guide – Part 2
अब शुरू होगा असली काम
4 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली विशेष अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM) केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। इसके सफल आयोजन के लिए शिक्षा विभाग ने जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक प्रत्येक अधिकारी, प्रधानाध्यापक और शिक्षक की अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निर्धारित की हैं।
यदि इन निर्देशों का सही ढंग से पालन किया जाए तो यह कार्यक्रम बिहार के विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों में इसकी विस्तृत रूपरेखा दी गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की भूमिका
जिला स्तर पर इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) की होगी।
उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि—
- जिले का कोई भी सरकारी विद्यालय PTM से वंचित न रहे।
- सभी विद्यालयों को समय पर निर्देश प्राप्त हो जाएँ।
- कार्यक्रम का प्रभावी संचालन हो।
- अधिकारियों की मॉनिटरिंग टीम गठित की जाए।
- कार्यक्रम की समीक्षा नियमित रूप से की जाए।
- आवश्यक रिपोर्ट समय पर राज्य मुख्यालय को भेजी जाए।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (SSA) की भूमिका
समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के अंतर्गत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी विशेष जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।
उन्हें—
- विद्यालयों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।
- CRC एवं BRC के माध्यम से तैयारियों की समीक्षा करनी होगी।
- कार्यक्रम के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध करानी होगी।
- रिपोर्ट संकलित करनी होगी।
- कार्यक्रम की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) की जिम्मेदारी
प्रखंड स्तर पर PTM की सफलता काफी हद तक BEO की सक्रियता पर निर्भर करेगी।
उन्हें—
✔ सभी विद्यालयों से नियमित संपर्क रखना होगा।
✔ विद्यालयों की तैयारियों की समीक्षा करनी होगी।
✔ आवश्यक दिशा-निर्देश देना होगा।
✔ कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा।
✔ CRC समन्वयकों के माध्यम से रिपोर्ट प्राप्त करनी होगी।
✔ यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकतम अभिभावक कार्यक्रम में भाग लें।
CRC समन्वयक की क्या भूमिका होगी?
शिक्षा विभाग ने Cluster Resource Centre (CRC) की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण मानी है।
CRC समन्वयक—
- विद्यालयों का पूर्व भ्रमण करेंगे।
- प्रधानाध्यापकों से बैठक करेंगे।
- PTM के संचालन की रणनीति समझाएँगे।
- लगभग 80–90 मिनट का कार्यक्रम एजेंडा साझा करेंगे।
- कार्यक्रम के दिन विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे।
- फोटो, उपस्थिति एवं रिपोर्ट का सत्यापन करेंगे।
प्रधानाध्यापक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
विद्यालय स्तर पर पूरे कार्यक्रम की कमान प्रधानाध्यापक के हाथ में होगी।
उन्हें केवल बैठक आयोजित नहीं करनी है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक अभिभावक को विद्यालय आने का अवसर मिले।
प्रधानाध्यापक को क्या-क्या तैयारी करनी होगी?
1. विद्यालय स्तरीय योजना
सबसे पहले विद्यालय स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
इसमें—
- समय
- स्थान
- जिम्मेदार शिक्षक
- स्वागत व्यवस्था
- अभिभावकों की सूची
- कार्यक्रम संचालन
जैसी सभी बातें पहले से तय करनी होंगी।
2. सभी शिक्षकों की बैठक
प्रधानाध्यापक को PTM से पहले सभी शिक्षकों की बैठक बुलानी होगी।
इस बैठक में—
- कौन किस कार्य का प्रभारी होगा।
- कौन अभिभावकों से संपर्क करेगा।
- कौन मंच संचालन करेगा।
- कौन फोटो लेगा।
- कौन उपस्थिति दर्ज करेगा।
- कौन रिपोर्ट तैयार करेगा।
इन सभी कार्यों का स्पष्ट विभाजन करना होगा।
SMC, बाल संसद एवं मीना मंच की भूमिका
विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC), बाल संसद एवं मीना मंच को भी इस कार्यक्रम से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
इनका सहयोग लेने से—
- अभिभावकों तक सूचना जल्दी पहुँचती है।
- गाँव में जागरूकता बढ़ती है।
- अधिक लोग कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
- विद्यालय और समुदाय का संबंध मजबूत होता है।
प्रचार-प्रसार कैसे होगा?
शिक्षा विभाग ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिकतम अभिभावक शामिल हों।
विद्यालय निम्न माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं—
- व्हाट्सएप ग्रुप
- मोबाइल कॉल
- SMS
- व्यक्तिगत निमंत्रण
- गाँव में सूचना
- माइकिंग (जहाँ आवश्यक हो)
- विद्यालय सूचना पट्ट
- पंचायत भवन
- आंगनबाड़ी केन्द्र
- स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना
किन अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क करना अनिवार्य है?
यह इस PTM का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
विद्यालयों को विशेष रूप से निम्न बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क करना होगा—
नियमित अनुपस्थित विद्यार्थी
जो बच्चे लगातार विद्यालय नहीं आ रहे हैं।
ड्रॉपआउट बच्चे
जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी है।
कमजोर विद्यार्थी
जिनकी पढ़ाई में लगातार गिरावट आ रही है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
दिव्यांग या अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता वाले विद्यार्थी।
इन परिवारों को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करना इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमुख आधार माना गया है।
विद्यालय परिसर की तैयारी
कार्यक्रम से पहले विद्यालय को पूरी तरह व्यवस्थित करना होगा।
इसमें—
- परिसर की सफाई
- कक्षाओं की सफाई
- पेयजल व्यवस्था
- शौचालय की सफाई
- बिजली की व्यवस्था
- पंखे
- बैठने की व्यवस्था
- स्वागत कक्ष
- सूचना पट्ट
- दिशा संकेत
आदि शामिल होंगे।
बैठक के लिए किन अभिलेखों को तैयार रखना होगा?
शिक्षकों को पहले से निम्न अभिलेख तैयार रखने चाहिए—
- विद्यार्थी उपस्थिति रजिस्टर
- नामांकन सूची
- ड्रॉपआउट सूची
- प्रगति रिपोर्ट
- परिणाम विवरण
- सरकारी योजनाओं का विवरण
- SMC रजिस्टर
- PTM उपस्थिति रजिस्टर
- सुझाव पंजी
- फोटो दस्तावेजीकरण
बच्चों की प्रगति रिपोर्ट कैसे तैयार करें?
प्रत्येक शिक्षक अपने वर्ग के बच्चों के लिए संक्षिप्त प्रगति रिपोर्ट तैयार करें, जिसमें—
- उपस्थिति प्रतिशत
- पढ़ने की क्षमता
- लिखने की क्षमता
- गणितीय दक्षता
- व्यवहार
- अनुशासन
- गृहकार्य
- विशेष उपलब्धियाँ
- सुधार की आवश्यकता
जैसे बिंदु शामिल हों।
PTM के लिए स्वागत व्यवस्था
विद्यालय में आने वाले अभिभावकों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए।
प्रवेश द्वार पर—
- स्वागत बैनर
- विद्यालय का नाम
- कार्यक्रम का नाम
- तिथि
- स्वागत डेस्क
होना चाहिए।
बैठने की व्यवस्था
अभिभावकों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था हो।
यदि संख्या अधिक हो तो—
- अतिरिक्त कुर्सियाँ
- दरी
- छाया
- पीने का पानी
- प्राथमिक चिकित्सा
की व्यवस्था भी रखी जाए।
क्या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है?
हाँ।
यदि समय और संसाधन उपलब्ध हों तो—
- स्वागत गीत
- सरस्वती वंदना
- प्रेरक कविता
- बाल नाटक
- स्वच्छता गीत
- शिक्षा पर लघु प्रस्तुति
जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
इससे अभिभावकों की रुचि बढ़ती है और विद्यालय का सकारात्मक वातावरण दिखाई देता है।
PTM के दौरान प्रदर्शनी भी लगाई जा सकती है
विद्यालय अपने कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए—
- विज्ञान मॉडल
- गणित मॉडल
- कला प्रदर्शनी
- पुस्तक प्रदर्शनी
- खेल सामग्री
- ICT लैब
- स्मार्ट क्लास
- पौधारोपण अभियान
का प्रदर्शन कर सकता है।
शिक्षक किन बातों का विशेष ध्यान रखें?
- प्रत्येक अभिभावक से सम्मानपूर्वक बात करें।
- बच्चे की कमियों के साथ उसकी उपलब्धियाँ भी बताएँ।
- समाधान आधारित चर्चा करें।
- किसी भी बच्चे की सार्वजनिक आलोचना न करें।
- अभिभावकों की बात ध्यान से सुनें।
- सुझावों को लिखित रूप में दर्ज करें।
इस चरण का मुख्य उद्देश्य
PTM का पहला लक्ष्य केवल बैठक आयोजित करना नहीं बल्कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच विश्वास का वातावरण बनाना है।
जब अभिभावक विद्यालय को अपना सहयोगी मानेंगे, तभी बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आएँगे और शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।
अब बात करते हैं PTM के वास्तविक आयोजन की
किसी भी अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM) की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कितने अभिभावक आए, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि विद्यालय ने उनसे किस प्रकार संवाद स्थापित किया, उनकी समस्याएँ सुनीं और बच्चों के भविष्य के लिए क्या कार्ययोजना बनाई।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में विद्यालयों को PTM के आयोजन के लिए विस्तृत एजेंडा तैयार करने, अभिभावकों का सम्मानपूर्वक स्वागत करने, बच्चों की प्रगति साझा करने तथा कार्यक्रम की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
PTM शुरू होने से पहले क्या करें?
कार्यक्रम प्रारंभ होने से लगभग 30 मिनट पहले सभी तैयारियाँ पूरी कर लें।
विद्यालय परिसर की अंतिम जाँच
- मुख्य द्वार की सफाई
- स्वागत बैनर लगाना
- पेयजल की व्यवस्था
- शौचालय की सफाई
- बैठने की व्यवस्था
- ध्वनि प्रणाली (यदि उपलब्ध हो)
- बिजली एवं पंखे
- प्राथमिक उपचार सामग्री
- उपस्थिति पंजी
- सुझाव पंजी
- फीडबैक फॉर्म
- सरकारी योजनाओं का प्रदर्शन
- बच्चों की उपलब्धियों का प्रदर्शन
स्वागत कक्ष कैसे तैयार करें?
प्रवेश द्वार पर एक स्वागत कक्ष बनाया जाए जहाँ—
- अभिभावकों का नाम दर्ज किया जाए।
- उपस्थिति हस्ताक्षर कराए जाएँ।
- उन्हें बैठक स्थल तक मार्गदर्शन दिया जाए।
- आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
यदि विद्यालय में स्काउट-गाइड, बाल संसद या मीना मंच सक्रिय है, तो उनके सदस्य भी स्वागत में सहयोग कर सकते हैं।
80–90 मिनट का आदर्श PTM कार्यक्रम
पहला चरण (10 मिनट)
स्वागत एवं परिचय
- सरस्वती वंदना (यदि विद्यालय की परंपरा हो)
- स्वागत गीत
- प्रधानाध्यापक द्वारा स्वागत
- कार्यक्रम का उद्देश्य
दूसरा चरण (15 मिनट)
विद्यालय की उपलब्धियाँ
प्रधानाध्यापक निम्न विषयों की जानकारी दें—
- विद्यालय की उपलब्धियाँ
- बोर्ड परीक्षा परिणाम
- नामांकन
- उपस्थिति
- खेल उपलब्धियाँ
- सांस्कृतिक गतिविधियाँ
- विज्ञान प्रदर्शनी
- पुस्तकालय
- स्मार्ट क्लास
- ICT सुविधा
तीसरा चरण (20 मिनट)
सरकारी योजनाओं की जानकारी
अभिभावकों को विस्तार से बताया जाए—
- नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक
- पोशाक योजना
- छात्रवृत्ति
- मध्याह्न भोजन
- साइकिल योजना (जहाँ लागू)
- खेल सामग्री
- स्वच्छ पेयजल
- स्वास्थ्य जांच
- पुस्तकालय
- डिजिटल शिक्षा
चौथा चरण (20 मिनट)
विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा
यह PTM का सबसे महत्वपूर्ण भाग होगा।
प्रत्येक शिक्षक—
- बच्चे की उपस्थिति बताएँ।
- पढ़ाई की स्थिति समझाएँ।
- विषयवार प्रदर्शन बताएँ।
- व्यवहार एवं अनुशासन पर चर्चा करें।
- सुधार के सुझाव दें।
- अभिभावकों के प्रश्नों का उत्तर दें।
पाँचवाँ चरण (15 मिनट)
सुझाव एवं प्रश्न
अभिभावकों से पूछा जाए—
- विद्यालय में क्या सुधार होना चाहिए?
- बच्चों की पढ़ाई में क्या कठिनाई है?
- विद्यालय से क्या अपेक्षा है?
- घर पर क्या सहयोग मिल सकता है?
सभी सुझाव लिखित रूप में दर्ज किए जाएँ।
अंतिम चरण (10 मिनट)
धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में—
- सभी अभिभावकों का धन्यवाद।
- अगली PTM की जानकारी।
- बच्चों की नियमित उपस्थिति का संकल्प।
शिक्षक क्या करें?
1. सकारात्मक वातावरण बनाएँ
शिक्षक मुस्कुराकर अभिभावकों का स्वागत करें।
2. बच्चे की अच्छाइयों से शुरुआत करें
पहले बच्चे की उपलब्धियाँ बताएँ।
फिर धीरे-धीरे सुधार की आवश्यकता वाले विषयों पर चर्चा करें।
3. समाधान बताएँ
केवल समस्या न बताएँ।
बल्कि यह भी बताएँ—
- घर पर क्या करें।
- विद्यालय क्या करेगा।
- बच्चा क्या करेगा।
4. सभी अभिभावकों को बराबर सम्मान दें
किसी भी अभिभावक के आर्थिक, सामाजिक या शैक्षणिक स्तर के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
5. धैर्यपूर्वक सुनें
कई अभिभावकों के मन में प्रश्न होंगे।
उनकी बात पूरी सुनें।
बीच में न रोकें।
शिक्षक क्या बिल्कुल नहीं करें?
❌ बच्चे को सबके सामने डाँटना
❌ दूसरे बच्चे से तुलना करना
❌ अभिभावक को अपमानित करना
❌ राजनीतिक चर्चा
❌ जातीय टिप्पणी
❌ धार्मिक टिप्पणी
❌ व्यक्तिगत टिप्पणी
❌ गलत जानकारी देना
❌ बिना प्रमाण आरोप लगाना
❌ मोबाइल पर व्यस्त रहना
अभिभावकों को क्या करना चाहिए?
विद्यालय पहुँचने के बाद—
- समय पर आएँ।
- शिक्षक से शांति से बात करें।
- बच्चे की पढ़ाई की जानकारी लें।
- घर की समस्या बताएँ।
- सुझाव दें।
- विद्यालय का सहयोग करें।
- बच्चे को नियमित विद्यालय भेजने का संकल्प लें।
अभिभावकों को क्या नहीं करना चाहिए?
❌ शिक्षक से बहस
❌ बच्चों के सामने विवाद
❌ अफवाह फैलाना
❌ विद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना
❌ अनुशासनहीनता
विद्यार्थियों की भूमिका
PTM केवल अभिभावकों और शिक्षकों के लिए नहीं है।
विद्यार्थियों को भी—
- समय पर विद्यालय आना चाहिए।
- साफ-सुथरी वर्दी पहननी चाहिए।
- अभिभावकों का सम्मान करना चाहिए।
- विद्यालय का परिचय देना चाहिए।
- अपनी उपलब्धियाँ दिखानी चाहिए।
प्रधानाध्यापक का प्रेरक संदेश
प्रधानाध्यापक अपने संबोधन में कह सकते हैं—
"विद्यालय और परिवार एक गाड़ी के दो पहिए हैं। यदि दोनों मिलकर बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। हमारा उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना भी है।"
शिक्षक का संदेश
"आपका बच्चा केवल विद्यालय का विद्यार्थी नहीं, बल्कि हमारा अपना बच्चा है। यदि विद्यालय और परिवार साथ मिलकर कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से उसका भविष्य उज्ज्वल होगा।"
अभिभावकों से लिया जाने वाला संकल्प
हम अपने बच्चों को—
✔ प्रतिदिन विद्यालय भेजेंगे।
✔ घर पर पढ़ाई का समय देंगे।
✔ मोबाइल का सीमित उपयोग करवाएँगे।
✔ विद्यालय से नियमित संपर्क रखेंगे।
✔ प्रत्येक PTM में भाग लेंगे।
विद्यालय के लिए विस्तृत चेकलिस्ट
कार्यक्रम से पहले
✅ निमंत्रण भेजा गया
✅ शिक्षक बैठक
✅ SMC बैठक
✅ बाल संसद बैठक
✅ मीना मंच बैठक
✅ परिसर की सफाई
✅ पेयजल
✅ शौचालय
✅ बैठने की व्यवस्था
✅ बैनर
✅ ध्वनि व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान
✅ उपस्थिति
✅ स्वागत
✅ योजनाओं की जानकारी
✅ सुझाव
✅ फोटो
✅ वीडियो
✅ मीडिया
कार्यक्रम के बाद
✅ कार्यवाही तैयार
✅ फोटो सुरक्षित
✅ सुझाव संकलन
✅ अनुपस्थित अभिभावकों से संपर्क
✅ रिपोर्ट तैयार
फोटो कैसे लें?
रिपोर्टिंग के लिए निम्न प्रकार की तस्वीरें लें—
- विद्यालय का मुख्य द्वार
- स्वागत बैनर
- अभिभावकों की उपस्थिति
- शिक्षक द्वारा संबोधन
- प्रधानाध्यापक का संबोधन
- विद्यार्थियों की सहभागिता
- सरकारी योजनाओं का प्रदर्शन
- समूह फोटो
ध्यान रखें कि तस्वीरें स्पष्ट हों और कार्यक्रम की वास्तविक गतिविधियाँ दिखाई दें।
रिपोर्टिंग क्यों महत्वपूर्ण है?
शिक्षा विभाग ने कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के साथ-साथ उसकी रिपोर्टिंग पर भी विशेष जोर दिया है। विद्यालयों को उपस्थिति, गतिविधियों, फोटो तथा आवश्यक विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
PTM का वास्तविक उद्देश्य
इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिन की बैठक आयोजित करना नहीं है।
बल्कि—
- विद्यालय और परिवार के बीच विश्वास बढ़ाना।
- बच्चों की शिक्षा में साझेदारी विकसित करना।
- ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाना।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
- समुदाय को विद्यालय से जोड़ना।
यदि इन उद्देश्यों को गंभीरता से लागू किया जाए तो बिहार की विद्यालयी शिक्षा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
PTM समाप्त होने के बाद विद्यालय को क्या करना है?
अक्सर देखा जाता है कि विद्यालय PTM का आयोजन तो कर लेते हैं, लेकिन बैठक के बाद लिए गए निर्णयों पर कार्य नहीं करते। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि संगोष्ठी का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब बैठक के बाद प्राप्त सुझावों एवं निर्णयों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद ये कार्य करें
1. उपस्थिति का मिलान करें
- कुल आमंत्रित अभिभावक
- कुल उपस्थित अभिभावक
- अनुपस्थित अभिभावक
- उपस्थिति प्रतिशत
इन सभी का रिकॉर्ड तैयार करें।
2. सुझावों का विश्लेषण करें
बैठक के दौरान प्राप्त सुझावों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करें—
- पढ़ाई संबंधी सुझाव
- भवन संबंधी सुझाव
- पेयजल
- शौचालय
- खेल सामग्री
- पुस्तकालय
- स्मार्ट क्लास
- अनुशासन
- सुरक्षा
- स्वच्छता
3. कार्ययोजना तैयार करें
सभी सुझावों पर विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना बनाएं।
उदाहरण—
| समस्या | समाधान | जिम्मेदार व्यक्ति | समय सीमा |
|---|---|---|---|
| कम उपस्थिति | घर-घर संपर्क | वर्ग शिक्षक | 15 दिन |
| कमजोर विद्यार्थी | अतिरिक्त कक्षा | विषय शिक्षक | 1 माह |
| पेयजल समस्या | पंचायत से संपर्क | प्रधानाध्यापक | 7 दिन |
Google Form द्वारा रिपोर्टिंग
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, PTM के आयोजन के उपरांत निर्धारित Google Form के माध्यम से कार्यक्रम की रिपोर्ट उपलब्ध करानी है। पत्र के अंतिम पृष्ठ में संबंधित Google Form का लिंक भी दिया गया है। विद्यालयों को समय पर आवश्यक जानकारी एवं कार्यक्रम से संबंधित विवरण अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट भरते समय सामान्यतः निम्न जानकारी तैयार रखें—
- विद्यालय का नाम
- UDISE Code
- जिला
- प्रखंड
- प्रधानाध्यापक का नाम
- कुल नामांकित विद्यार्थी
- कुल उपस्थित अभिभावक
- कुल शिक्षक
- कार्यक्रम की तिथि
- कार्यक्रम की तस्वीरें
- प्रमुख गतिविधियाँ
- प्राप्त सुझाव
- विशेष उपलब्धियाँ
PTM के बाद किन बच्चों पर विशेष ध्यान दें?
बैठक के बाद केवल रिपोर्ट भेजना ही पर्याप्त नहीं है।
विद्यालय को निम्न बच्चों की सूची तैयार करनी चाहिए—
1. नियमित अनुपस्थित विद्यार्थी
इनके घर दोबारा संपर्क करें।
2. ड्रॉप आउट बच्चे
व्यक्तिगत मुलाकात करें।
पुनः नामांकन का प्रयास करें।
3. कमजोर विद्यार्थी
विशेष कक्षाएँ आयोजित करें।
4. प्रतिभाशाली विद्यार्थी
अतिरिक्त अवसर प्रदान करें।
40 महत्वपूर्ण FAQs
Q1. PTM कब आयोजित होगी?
उत्तर: 4 जुलाई 2026।
Q2. किन विद्यालयों में?
सभी सरकारी विद्यालय।
Q3. मुख्य विषय क्या है?
ड्रॉप आउट, सरकारी योजनाएं एवं विद्यालय की मौलिक सुविधाएं।
Q4. अभिभावकों को क्यों बुलाया जा रहा है?
बच्चों की पढ़ाई एवं विकास पर चर्चा के लिए।
Q5. क्या उपस्थिति अनिवार्य है?
अधिकतम अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
Q6. क्या ड्रॉप आउट बच्चों की सूची बनेगी?
हाँ।
Q7. क्या सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी?
हाँ।
Q8. क्या प्रधानाध्यापक को तैयारी करनी होगी?
हाँ।
Q9. क्या CRC निरीक्षण करेगा?
हाँ।
Q10. क्या रिपोर्ट भेजनी होगी?
हाँ।
Q11. क्या PTM के दौरान फोटो लेना जरूरी है?
उत्तर: हाँ। विद्यालय को कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियों जैसे अभिभावकों की उपस्थिति, प्रधानाध्यापक के संबोधन, शिक्षकों द्वारा संवाद, विद्यार्थियों की सहभागिता तथा समूह फोटो का दस्तावेजीकरण करना चाहिए। इन तस्वीरों का उपयोग रिपोर्टिंग एवं अभिलेख के रूप में किया जा सकता है।
Q12. क्या अभिभावकों के सुझाव लिखित रूप में लिए जाएंगे?
उत्तर: हाँ। विद्यालय को सुझाव पंजी (Suggestion Register) या फीडबैक फॉर्म के माध्यम से अभिभावकों के सुझाव लिखित रूप में प्राप्त करने चाहिए ताकि उन पर आगे कार्य किया जा सके।
Q13. क्या PTM के लिए अलग उपस्थिति रजिस्टर बनाया जाएगा?
उत्तर: हाँ। कार्यक्रम में शामिल सभी अभिभावकों एवं अतिथियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए अलग PTM उपस्थिति पंजी रखना उचित होगा।
Q14. क्या शिक्षक प्रत्येक अभिभावक से अलग-अलग मिलेंगे?
उत्तर: हाँ। प्रत्येक वर्ग शिक्षक अपने वर्ग के अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे और बच्चे की प्रगति, उपस्थिति एवं सुधार के विषय में चर्चा करेंगे।
Q15. क्या बच्चों की शैक्षणिक प्रगति बताई जाएगी?
उत्तर: हाँ। प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई, उपस्थिति, व्यवहार, सीखने का स्तर तथा सुधार की आवश्यकता के बारे में अभिभावकों को जानकारी दी जाएगी।
Q16. क्या विद्यालय की सुविधाएँ अभिभावकों को दिखाई जाएँगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय परिसर, कक्षाएँ, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल मैदान, स्मार्ट क्लास एवं अन्य उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी अभिभावकों को दी जानी चाहिए।
Q17. क्या पुस्तकालय का अवलोकन कराया जाएगा?
उत्तर: हाँ। यदि विद्यालय में पुस्तकालय उपलब्ध है, तो अभिभावकों को पुस्तकालय की व्यवस्था और बच्चों के उपयोग की जानकारी देना उपयोगी रहेगा।
Q18. क्या ICT Lab या Smart Class का प्रदर्शन किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ। विद्यालय में उपलब्ध ICT लैब, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर या डिजिटल शिक्षण संसाधनों का प्रदर्शन किया जा सकता है ताकि अभिभावक आधुनिक शिक्षण व्यवस्था से परिचित हो सकें।
Q19. क्या विज्ञान मॉडल प्रदर्शित किए जा सकते हैं?
उत्तर: हाँ। विद्यार्थियों द्वारा तैयार विज्ञान मॉडल, गणित मॉडल एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की प्रदर्शनी लगाई जा सकती है।
Q20. क्या खेल सामग्री दिखाई जाएगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय में उपलब्ध खेल सामग्री एवं खेल गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों को देना लाभदायक रहेगा।
Q21. क्या स्वच्छता पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। बच्चों की व्यक्तिगत स्वच्छता, विद्यालय परिसर की साफ-सफाई एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर चर्चा की जाएगी।
Q22. क्या बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। बच्चों के स्वास्थ्य, संतुलित आहार, मध्याह्न भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी साझा की जा सकती है।
Q23. क्या अनुशासन पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय में अनुशासन, समयपालन, नियमित उपस्थिति तथा अच्छे व्यवहार के महत्व पर अभिभावकों से चर्चा की जाएगी।
Q24. क्या डिजिटल शिक्षा के बारे में जानकारी दी जाएगी?
उत्तर: हाँ। यदि विद्यालय में डिजिटल शिक्षण की सुविधा उपलब्ध है, तो उसकी जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी।
Q25. क्या कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी?
उत्तर: हाँ। जिन विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की आवश्यकता है, उनकी पहचान कर अभिभावकों के साथ सुधारात्मक योजना साझा की जाएगी।
Q26. क्या अतिरिक्त कक्षाओं (Remedial Classes) पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। आवश्यकता होने पर कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण सहायता या विशेष कक्षाओं की योजना पर चर्चा की जा सकती है।
Q27. क्या विद्यालय समुदाय का सहयोग लेगा?
उत्तर: हाँ। विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC), स्थानीय समुदाय एवं अभिभावकों का सहयोग लेकर शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
Q28. क्या भविष्य में भी PTM आयोजित की जाएगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय समय-समय पर अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित कर बच्चों की प्रगति की समीक्षा कर सकता है।
Q29. क्या PTM की रिपोर्ट सुरक्षित रखनी होगी?
उत्तर: हाँ। उपस्थिति, कार्यवाही, सुझाव एवं अन्य दस्तावेज विद्यालय अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखने चाहिए।
Q30. क्या कार्यक्रम की फोटो एवं वीडियो सुरक्षित रखने होंगे?
उत्तर: हाँ। कार्यक्रम का फोटो एवं वीडियो रिकॉर्ड भविष्य की रिपोर्टिंग और संदर्भ के लिए सुरक्षित रखना उचित होगा।
Q31. क्या विद्यालय कार्यवाही पंजी तैयार करेगा?
उत्तर: हाँ। बैठक में हुई चर्चा, निर्णय एवं सुझावों को कार्यवाही पंजी (Minutes Register) में दर्ज किया जाना चाहिए।
Q32. क्या अभिभावकों के सुझावों पर कार्रवाई होगी?
उत्तर: हाँ। उपयोगी सुझावों का विश्लेषण कर विद्यालय स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
Q33. क्या नामांकन बढ़ाने की योजना बनेगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय से बाहर (Out of School) बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराने एवं ड्रॉपआउट कम करने की रणनीति बनाई जाएगी।
Q34. क्या अभिभावकों से फीडबैक लिया जाएगा?
उत्तर: हाँ। विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, सुविधाओं एवं बच्चों की पढ़ाई के संबंध में अभिभावकों से फीडबैक लेना उपयोगी रहेगा।
Q35. क्या विद्यालय विकास पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय भवन, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, खेल, स्मार्ट क्लास, पौधारोपण एवं अन्य विकास कार्यों पर चर्चा की जाएगी।
Q36. क्या बच्चों की सुरक्षा पर चर्चा होगी?
उत्तर: हाँ। विद्यालय में सुरक्षित वातावरण, आपदा प्रबंधन, बाल सुरक्षा तथा विद्यालय आने-जाने के दौरान सावधानियों पर भी चर्चा की जा सकती है।
Q37. क्या शिक्षक घर-घर संपर्क करेंगे?
उत्तर: हाँ। विशेष रूप से नियमित अनुपस्थित, ड्रॉपआउट तथा कम उपस्थिति वाले बच्चों के अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
Q38. क्या अनुपस्थित अभिभावकों से बाद में संपर्क किया जाएगा?
उत्तर: हाँ। जो अभिभावक PTM में शामिल नहीं हो पाए, उनसे बाद में संपर्क कर बैठक की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जानी चाहिए।
Q39. क्या विद्यालय को Google Form भरना होगा?
उत्तर: हाँ। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशानुसार कार्यक्रम के आयोजन के बाद निर्धारित Google Form के माध्यम से आवश्यक रिपोर्ट एवं जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
Q40. क्या यह कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए है?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल। इस विशेष अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक एवं समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाकर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालय से जोड़ना, सरकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाना है।
- PTM Speech (प्रधानाध्यापक के लिए 5 मिनट का भाषण)
- Teacher Script (अभिभावकों से क्या बोलें)
- विद्यालय नोटिस का रेडी-टू-यूज़ प्रारूप
- SMC बैठक कार्यवाही प्रारूप
- PTM उपस्थिति रजिस्टर का नमूना
- फोटो कैप्शन (20–25 तैयार कैप्शन)
- FAQ Schema (40 प्रश्न)
- Article + NewsArticle JSON-LD Schema
- Open Graph एवं Twitter Meta Tags
- PTM की 15 SEO-अनुकूल इन्फोग्राफिक्स