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1.4 पुस्तकालय विज्ञान के पंच सिद्धांत (Five Laws of Library Science) – डॉ. एस. आर. रांगनाथन

भारत के प्रसिद्ध पुस्तकालय विज्ञानी डॉ. एस. आर. रांगनाथन (Dr. S. R. Ranganathan) को पुस्तकालय विज्ञान का जनक कहा जाता है। उन्होंने सन् 1931 में पुस्तकालयों के संचालन और सेवाओं को व्यवस्थित करने हेतु पुस्तकालय विज्ञान के पाँच महान सिद्धांत (Five Laws of Library Science) प्रतिपादित किए।
इन सिद्धांतों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुस्तकालय न केवल पुस्तकों का संग्रह हो, बल्कि वह एक जीवंत, उपयोगी और समाजोपयोगी संस्था बन सके।
1. पुस्तकें उपयोग के लिए हैं
(Books are for use)
यह सिद्धांत बताता है कि पुस्तकें केवल सजावट या संग्रह के लिए नहीं, बल्कि पढ़ने और उपयोग करने के लिए होती हैं। पुस्तकालय को ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जहाँ पाठक आसानी से पुस्तक तक पहुँच सके।
मुख्य बिंदु:
पुस्तकें अलमारियों में बंद न हों।
पाठकों को पुस्तक तक आसान पहुँच मिले।
लाइब्रेरी को खुला और सुलभ बनाना।
2. हर पाठक के लिए उसकी पुस्तक
(Every reader his/her book)
इसका अर्थ है कि हर व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार पुस्तक मिलनी चाहिए। पुस्तकालय में सभी उम्र, वर्ग, और रुचि के पाठकों के लिए सामग्री ह...
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